”डायनासोर के जुड़े तथ्य

 हम सब ने  जोरास्देसिक फिम्ल देखि  ही है तो आज हम इसी डायनासोर के रहष्य व उससे जुरे fact के बारे में जानेंगे .
पुरे सात महादिपो पर डायनासोर के जीवाश्म पाए गए है जिन में से कुछ गेर-एविन डायनासोर 66 million साल पहले विलुप्त हो गये थे.माना जाता है की 250 लाख
पहले डायनासोरो का राज हुआ करता था. कुछ वैज्ञानिक का मानना है की 700 प्रजातीय है

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”जीवाश्म विज्ञानिक”
आज के पक्षी एक प्रकार के डायनासोर है क्योकि उनके उड़ने के लिए फंख उस समय के डायनासोरो के पंखो से मेल(साझा करते है ) खाते है कुछ वैज्ञानिक आज भी विलुप्त हुए डायनासोर के कंकालों की खोज में है और मिलो हुए कंकालो से ये पता लगाने में लागे है की वो किस तरह के डायनासोर है जेसे उसके दांत , हड्डी , और उनके गतिविधि के सबूत जेसे की उनके पैरो के निशान
हम जो कुछ भी जानते है डायनासोर के बारे में वो जीवाश्म पर आधारित है हड्डिया ,दांत पैरो के निशान ये सब इस में सामिल है
कुछ लोग बरनम ब्राउन को मानते है, जिन्होंने 1897 में अमेरिका के अमेरिकन म्यूजियम ऑफ़ नेचुरल हिस्टरी में अपने करिअर की शुरूआत की थी उन्होंने 19वी सदी के अंत 20वी सदी के शुरुआत उन्होंने तयरानोरस रेक्स की खोज की थी जो एक महान खोज थी

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”डायनासोर का यूग”
सबसे पहले डायनासोर को 245 लाख  साल पहले (लेट ट्रायसिक काल 250 से 210 लाख ) साल के पूर्व दिखाई दिया था | डायनासोर एक विसाल सरणी के साथ उत्तपन हुए थे | इसके विपरीत कुछ लोग का कहना है की सभी डायनासोर भू-वैज्ञानिक अवधि के दोरान नही रहते थे| जेसे की स्टेगोसोरास ,लगभग 150 लाख  साल पहले जुरासिक समय रहतेथे तयरानोरस रेक्स लगभग 72 लाख साल पहले लेट क्रेतेशियम पिरीयड के समय रहते थे |मेसोजोइक एरा 180 लाख साल से अधिक साल की अवधि जिसमे ट्राईसिक और क्रेतेशियम अब्धि सामिल है उस समय गेर-एविन डायनासोर की एक प्रजाति एविन डायनासोर प्रजातिविकसित हुआ | यह ये एविन डायनासोर पहला पक्षी है और सभी पक्षी डायनासोर का उत्तपन इसी से हुआ प्रतेक गेरएविन डायनासोर 66 साल पहले विलुत्प हो गये |
वैज्ञानिको का कहना है की जब डायनासोरो का अंत हुआ तब एक विशाल धूमकेतु पृथवी से टकराया होगा जिससे पृथ्वी के वातावरण में एक बदलाव हुआ होगा | कुछ वैज्ञानिक का मानना हैकी समय बदलते गये और समुन्द्र के स्तर और बड़े पैमाने पर ज्वालामुखी गतिविधि सहित अन्य कारणों से इस बड़े पैमाने वाले जीव विलुप्त होते गये

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”डायनासोर के जीवाश्म”
पेलियोन्तोलोजिस्त प्राचीन चट्टान में जीवाश्म खोज में उपयोग करते है ताकि पता चल सके जो सालो से लुप्त हुए केसे रहते थे और उनका व्यवहार केसा करते थे
ज्यादातर मामलो में एक जीवाश्म हड्डी वास्तव में खनिजो से बना एक चट्टान है, जिसमे मूल हड्डी का कोई निसान नही है|
यह पता लगाने के लिए वैज्ञानिक लग है की कस्से अतीत में वे रहते थे , जीवाश्म वैज्ञानिक प्राचीन चट्टानों की तलाश करते है -जीवाश्म हड्ड्यो ,दातो ,अंडे ,पैरो के निशान ,दातो के निशान ,पत्तियों और यहाँ तक की प्राचीन जीवो का गोबर |जीवाश्म जबड़े,दांत और नॉन एविन डायनासोर क्या खाते थे ये पता लगाने में जुड़े है |कुछ समय पहले लोग कहते थे की आज काल के पक्षी के पंख जो उस सयम के गेर एवियन वाले डायनासोर के पंखो से ,एल खाते है पर कुछ सबूतों से ये पता चला की ये गलत ठ्य थी उनका कोई मेल ख

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ता नही है|

 

”दांत ,पंख और उनके पैरो के निशान”
जो डायनासोर मांस खाते थे वो अपने दातो का उपयोग सिर्फ मांस को फाड़ने में करते थे और उसे सीधा निगल जाते थे पोधो को खाने वाले डायनासोर के दांत अलग तरीको के बनावट थे उधारहं के लिए तैरेक्तोप्स दातो का बहार से अलग दांत हुआ करता था जो पैरो को काटने में उपयोग करते थे |
अन्य पोधो को खाने वाले जेसे अनातोटिटन के पास सपाट दांत थे जो मजबूत वनस्पति को चबाने में उपयोग करते थे लंबे गर्दन वाले डायनासोर सीधे पत्तो को निगल जाते थे| उसके बाद उनके पेट में पाचन की प्रिक्रिया होता था , जो आज काल के आधुनिक पक्षी ‘पेराकेट और मुर्गिया करते हैपंख उड़ने और डायनासोर को गर्म रखने और दुसरे साथी को आकर्षित करने के लिए कार्य करते थे |