मिस्त्र के पिरामिडों

मिस्त्र के पिरामिडों के बारे में कौन नहीं जानता। अद्भुत कला शैली और रहस्यों का बेजोड़ नमूना बन चुके यह पिरामिड दुनियाभर के सैलानियों और इतिहासकारों के लिए आकर्षण का केन्द्र बन चुके हैं। कई हजार वर्ष पूर्व बनाए गए इन पिरामिडों के विषय में यह भी माना जाता है। कि आज भी इनकी रक्षा कब्रों में रहने वाले लोग करते हैं। पिरामिड में दफ़्न आत्माएं अपने क्षेत्र के भीतर बाहरी लोगों के दखल को सहन नहीं कर पाती  है । और समय-समय पर अपने आसपास होने का अहसास करवाती रहती हैं।  इतिहास पर नजर डालें तो हम कई ऐसी घटनाओं के बारे में जान सकते हैं । जो पिरामिड में रहने वाली आत्माओं और उनसे जुड़े रहस्य को प्रमाणित करती हैं।

लेकिन अगर आपको यह लगता है कि मिस्र में केवल पिरामिड ही ऐसे रहस्यमय स्थान हैं। जिनसे संबंधित डरावनी और अविश्वसनीय अफवाहें हमें आय दिन सुनने को मिलती हैं।  तो आपको यह जानकर बेहद आश्चर्य होगा कि शोध दल ने वहां एक ऐसे मकबरे को भी ढूंढ़ निकाला है जिसकी स्थापना आज के लगभग 4,000 वर्ष पूर्व हुई थी।

बेल्जियम के कैथोलिक यूनिवर्सिटी ऑफ लौवेन से जुड़े पुरातत्वविदों ने एक ऐसे रहस्यमय मकबरे को खोज निकाला है। जिसे आज से कई हजार वर्षों पूर्व स्थापित किया गया था। इस मकबरे में एक पत्थर की पट्टिका पाई गई है, जिस पर अंतिम संस्कार से सम्बंधित प्राचीन आख्यान खुदे हुए हैं।

मिस्त्र के पुरातत्व मंत्री मुहम्मद इब्राहिम का भी यह कहना है । कि बीते कई वर्षों  में शायद ऐसा पहली बार हुआ है,कि किसी सुरक्षित मकबरे को खोज कर सार्वजनिक किया गया है। मुहम्मद हामिद के अनुसार इस मकबरे के निर्माण की तारीख प्राचीन मिस्त्र के प्रथम मध्यवर्ती कालावधि (2181-2055 ईसा पूर्व) की है. यह एक बेहद असामान्य खोज इसीलिए भी है। क्योंकि उस काल से जुड़ी किसी इमारत का सही सलामत मिलना तो दूर उसके अवशेष मिलना भी बहुत मुश्किल था. यह मकबरा किसका है।अभी इस रहस्य से पर्दा नहीं उठाया गया है। लेकिन मकबरे तक पहुंचने वाले दल का कहना है कि खुदाई के दौरान उन्होंने कई अलौकिक ताकतों और घटनाओं को महसूस किया है। निश्चित तौर पर यह भी किसी बेहद ताकतवर व्यक्ति का ही मकबरा है।

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