mughal empire family tree

मुगल साम्राज्य का इतिहास और मुगल बादशाहो से जुड़े रोचक जानकारी mughal empire family tree

भारत मे मुगलो के आगमन से लेकर उनके अंत तक भारत मे क्य नुकास हुआ। भारत का फायदा ओर भारत मे मूगल सम्राज्य| mughal empire family tree, mughal emperors, मुगलो के बारे मे जानेंगे

  • मुगल वंश का संस्थपक बाबर था। बाबर एव उत्तरवर्ती मुगल शासक तुर्क एव सुन्नी मुसलमान थे। बाबर ने मुगल वंश बकि स्थापना के साथ ही पद-पादशाही की सथापना की , जिसके तहत शासक को बादशाह कहा जाता था।

बाबर (1526-1530)

mughal empire family tree

भारत मे मुगलो का साम्राज्य की स्थापना करने वाला सासक बाबर था. जो (मूगल सम्राज्य| mughal empire family tree)  के पहले सासक था। बाबर का जन्म फरवरी, 1483 ई.मे हुआ था। इसके पिता उमर्शेख मिर्जा फरगाना नामक छोटे राज्य के शासक थे। बाबर फरगाना की गद्दि पर 8 जून, 1494ई.मे सास्क को अपने हाथ मे लिया।

  • बाबर ने 1507 ई. मे बादशाह की उपाधि धारण किय. जिसे अब तक किसी तैमुर शासक ने धारण नही की थी. बाबर के चार पुत्र थे‌‌‌‌–हुमायु , कानरान, असकरी तथा हिदाल्।
  • बाबर ने भारत पर पाँच बार आक्रमण किया। बाबर को मे भारत से विरुध्द किया गया प्रथम अभियान 1519 ई.मे युसुफ जाई जाति के विरोध्द किया था। इस अभियान मे बाबर ने बाजौर और भेरा को अपने अधिकार मे कर लिया।
  • पानीपत के प्रथमयुध्द मे बाबर ने पहली बार तुगलमा युध्द नीति एव तोपखाने का प्रयोग किया था। उस्ताद अली एव मुस्तफा एव तोपखाने ने प्रयोग किया था। उस्ताद अली एव मुस्तफा बाबर के दो प्रसिध्द निशानेबाज थे, जिसने पानीपत के प्रथम युध्द मे भाग लिया था।
  • इब्राहिम लोदी मध्यकाल का प्रथम शासक था जो युध्दस्थल मे मारा गया। इसके साथ उसका मित्र ग्वालियर के राजा विक्रमजीत भी युध्दस्थल मे मारा गया।
  • नोट: हुमायूँ ने कोहिनूर हीरा ग्वालियर के दिवंगत राजा विक्रमजीत के परिवार से प्राप्त किया था।
  • बाबर को अपनी उदारता के लिए कलन्दर की उपाधि दी गयी।
  • खानवा युध्द मे विजय के भाद बाबर ने “गाजी” की उपाधि धारन करने के बाद उसका मृत्यु हो गया। करीब 48 वर्ष की आयु मे 26 दिसम्बर, 1530 ई. को आगरा मे बाबर की मृत्यु हो गयी ।
  • बाबर ने अपनी आत्मकथा बाबरनामा की रचना करवाया, जिसका अनुवाद बाद मे फारसी भाषा मे अब्दुल रहीम खानखाना ने किया । अपनी आत्मकथा मे बाबरने औपचारिक बागो की योजनाओ और उनके बनाने मे अपनी रुचि का वर्णन किया है। अकसर ये बाग दीवार से घिरे होते थे तथा कृत्रिम नहरो व्दारा चार भागो मे विभाजित आयताकार अहाते मे स्थित थे। चार समान हिस्सो मे बँटे होने के कारण ये चार बाग कहलाते थे ।
  • नोट: चार बाग बनाने की परम्परा की शुरुआत अकबर के समय से हुई।
  • बाबर को मुबईयान नामक पधशैली का भी जन्मदाता माना जाता है ।
  • बाबर प्रसिध्द नक्शबन्दी सूफी ख्वाजा उबैदुल्ला अहरार का अनुयायी था ।
  • बाबर का उत्तराधिकारी हमायूँ हुआ ।
  • 30 जनवरी, 1528 ई. को जहर दे देने के कारण राणा साँगा की मृत्यु हो गई।

हुमायुँ (1530-1556)

हुमायु बाबर का उतरधिकारि था. (मूगल सम्राज्य| mughal empire family tree) के दुसरे सासक था। जिसका पुरा नाम नसीरुधीन हुमायूँ था, 29 दिसम्बर , 1530 ई. को आगरा मे 23 वर्ष की अवस्था मे सिहासन पर बैठा। गद्दी पर बैठने से पहले हमायूँ बदख्शाँ का सुबेदार था।

हुमायु ने अपने पिता के आदेश से mughal emperors की रचना किया ओर अपने भाइयो मे राज्य को बात दिया।

अपने पिता के निर्देश के अनुसार हुमायुँ ने राज्य का बँट्वारा अपने भाइयो मे कर दिया । इसने अपने कामरान को काबुल और कंधार , मिर्जा असकरी को सँभल , मिर्जा हिदाल को अलवर एव मेवाड की जागीरे दी । अपने चचेरे भाई सुलेमान मिर्जा को हुमायूँ ने बदख्शाँ प्रदेश दिया ।

  • 1533 ई. मे हुमायूँ ने दीनपनाह नामक नए नगर की स्थापना की थी।
  • चौसा का युध्द 25 जून , 1539 ई. मे शेर खाँ एव हुमायूँ के बीच हुआ । इस युध्द मे शेस खाँ विजयी रहा युध्द के बाद शेर खाँ ने शेरशाह की पदवी ग्रहण कर ली ।`

शेरशाह( 1540 -1545)

  • सुर साम्राज्य का संस्थापक अफगान वंशी से शेरशाह सुरी था। शेरशाह का जन्म 1472 मे बटवाड़ा(होशियारपुर) मे हुआ था। इनके बचपन का नाम फरीद खा था। यह सूर वंश से संबंधित था।
  • इनके पिता हसन खा जौनपुर राज्य के अंतर्गत सासाराम की जमींदार थे। फरीद ने एक शेर को एक वार मे  तलवार से मार दिया था।
  • उसकी इस बहादुरी से प्रसन्न होकर बिहार की अफगान सार्थक सुल्तान मोहम्मद बहार खा लोहानी ने उसे शेर खा की उपाधि प्रदान किया था। शेरशाह बिलग्राम 1540 के बाद दिल्ली की गद्दी पर बैठा।
  • शेरशाह की मृत्यु कालिंजर किले को जीतने के क्रम मैं 22 मई 1545 को ही गई. मृत्यु के समय वह उक्का नाम का अग्नियास्त्र चला रहा था।
  • कालिंजर का शासक कीरत सिंघ था।
  • शेरशाह का मकबरा सासाराम मे झील के बीच उचे टीले पर निर्मित किया गया है।
  • रोहतासगढ़ किला, किला ए कहुना (दिल्ली नामक मस्जिद का निर्माण शेरशाह ने किया  था।
  • शेरशाह का उत्तराधिकारी उसका पुत्र इस्लाम शाह था।
  • शेरशाह भूमि की माप के लिए 32 अंकवाला सिकंदरी गज एवं सन की  डंडी का प्रयोग किया।
  • शेरशाह ने 178 ग्रेन चांदी का रुपया 380 ग्रेन तांबे के दाम  चलवाया था।
  • शेरशाह ने रोहतासगढ़ के दुर्ग एवं कन्नोज के स्थान पर शेरसूर नामक एक नगर बसाया।
  • शेरशाह के समय पैदावार का लगभग 1/3 भाग सरकार लगान के रूप में महसूल करती थी।
  • कबूलियत एवं पट्टा प्रथा कि शुरुवात शेरशह ने की थी।
  • शेरशह ने  1541 मे पातलिपुत्र को पटना के नाम से  स्थापित किया।
  • शेरशाह ने ग्रैड ट्रक रोड की मरम्मत करवाई. मलिक मोहम्मद जयासी शेरशाह के समकालीन थे. डाक प्रथा का प्रचलन शेरशाहके द्वारा हुआ।

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अकबर 1556 1605

अकबर जो हुमायु का पुत्र था जिसने (मूगल सम्राज्य| mughal empire family tree) को आगे बढाया। जो आगे चल कर एक महन सम्राट बना। जिसका जन्म 15 अक्टूबर 1542 को हमीदा बानू बेगम के गर्भ से अमरकोट के राणा वीर साल के महल में हुआ।

  • अकबर के बचपन का नाम जलाल था। अकबर का राज्यअभिषेक 14 फरवरी 1556 को पंजाब के कलानौर नामक स्थान पर हुआ।
  • अकबर का शिक्षक अब्दुल लतीफ ईरानी विद्वान था।
  • वह जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर बादशाही गाजी की उपाधि से राजसिंहासन पर बैठा। बेरम खा 1556 से 1506 तक अकबर का सरंक्षक रहा।
  • पानीपत की दूसरी लड़ाई 5 नवंबर 15 56 को अकबर और हेमू के बीच हुई थी।
  • मक्का की तीर्थ यात्रा के दौरान पाटन नामक स्थान पर मुबारक खा नाम युवक बैरम खा की हत्या कर दी।
  • मई 1562 मे अकबर ने हरम दल से अपने को पूर्णत: मुक्त कर लिया।
  • हल्दीघाटी युद्ध 18 जून 1576 को मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप एवं अकबर के बीच हुआ। इस युद्ध मेअकबर विजयी  हुआ।  इस युद्ध में मुगल सेना का नेतृत्व मान सिंह एवं आसफ ने किया था। अकबर का सेनापति मान सिंघ था। प्रताप की मृत्यु 57 वर्ष की उमर में 19 जनवरी 1597 मे हो गई।
  • गुजरात विजय के दौरान अकबर सर्वप्रथम पुर्तगालियो से मिला ओर यही उसने सर्वप्रथम समुंद्र को देखा।
  • दीन ए इलाही धर्म का प्रधान पुरोहित अकबर था। दीन ए इलाही धर्म का स्वीकार करने वाला प्रथम एवं अंतिम हिंदू शासक बीरबल था।
  • अकबर ने जैन धर्म के जैन आचार्य हरि विजय सूरी को जगतगुरु की उपाधि प्रधान की थी.
  • अकबर ने शाही दरबार मे एक अनुष्ठान के रूप में सुर्यापासना शुरू करवाई। राजस्व  प्राप्ति की जब्ती प्रणाली अकबर के शासनकाल में प्रचलित थी।
  • अकबर की दीवान राजा टोडरमल (खत्री जाती) ने 1580 ई मे दहसाल बंदोबस्त व्यवस्था लागू की।
  • अकबर के दरबार का प्रसिद्ध संगीतकार तानसेन थे। अकबर के दरबार के प्रसिद्ध चित्रकार अब्दुर समद था। दसवंत एवं वह बसावन अकबर के दरबार के चित्रकार थे।
  • अकबर के शासनकाल के प्रमुख गायक तानसेन, बाज बहादुर, बाबा रामदास, एवं बैजू बाबरा थे। अकबर के शासन-प्रणाली की प्रमुख विशेषता मानसबदारी  प्रथा थी। अकबर के समकालीन प्रसिद्ध सूफी संत शेख सलीम चिश्ती थे।
  • अकबर की मृत्यु 16 अक्टूबर 1605 को हुई. उसे आगरा के निकट सिकंदरा में दफनाया गया।
  • स्थापत्यकला के छेत्र में अकबर की महत्वपूर्ण कृतियां है. दिल्ली में हुमायूं का मकबरा, आगरा का लालकिला, फतेहपुर सीकरी में शाहीमहल, दीवाने खास, पंचमहाल, बुलंद दरवाजा, जोधाबाई का महल, इबाहाबादखाना का किला और लाहौर का किला।
  • अकबर के दरबार को सुशोभित करने वाले नवरत्न इस प्रकार थे. 1.एक अबुल फजल 1 551-1602 2. फैजी 1547-15 95 3. तानसेन 4. बीरबल 5.टोडरमल 6.राजा मान सिंह 7. अब्दुल रहीम खान ए खाना 8. फकीर अजीउद्दीन 9. मुल्ला दो प्याजा।
  • अबुल फजल का बड़ा भाई फैजी अकबर के दरबार में राज्य कवि के पद पर आसीन था। अबुल-फजल ने अकबरनामा ग्रंथ की रचना की वह दीन ए  इलाही धर्म का मुख्य पुरोहित था।
  • बीरबल के बचपन का नाम महेश दास था।
  • संगीत सम्राट तानसेन का जन्म 1506 मे ग्वालियर मे एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. इनका असली नाम रामतनु पांडेय था।  कण्ठाभरण वाणीविलास की उपाधि अकबर ने तानसेन को दी थी।
  • अकबर के दरबार में आने से पूर्व रीवा के राजा रामचंद्र के राजाश्र मे थे।
  • अकबर के काल में स्वामी हरिदास भी एक महान संगीतकार थे. यह वृंदावन में रहकर भगवान की उपासना करते थे. एक मत के अनुसार हरिदास तानसेन के गुरु थे जब कि कुछ विद्वान हरिदास तानसेन दोनों को मानसी तोमर का शिष्य से बतलाते हैं यदि प्रचलित है. कि हरिदास का गाना सुनने के लिए अकबर को उनकी कुटिया पर जाना पड़ा क्योंकि उन्होंने अकबर के दरबार में जाने से मना कर दिया था. इनका कहना था कि वे केवल अपने भगवान के लिए ही गाते हैं दरबार में उनका कोई सरोकार नहीं।
  • अकबर ने भगवान दास आमिर उल उमरा की उपाधि दी।
  • युसूफजाइयो के विद्रोह को दबाने के दौरान बीरबल की हत्या हो गई।
  • 1602 मे सलीम जहांगीर के निर्देश पर दक्षिण से आगरा की ओर आ रहे अबुल-फजल को रास्ते में वीर सिंघ बुन्देला नामक सरदार ने हत्या कर दी।
  • मुगल सम्राट अकबर ने “अनुवाद विभाग” की स्थापना की।
  • नकीब खा, अब्दुल कादिर बदायूनी तथा शेख सुल्तान ने रामायण एवं महाभारत का फारसी अनुवाद किया वह महाभारत का नाम रज्मनामा युद्ध की पुस्तक रखा।
  • पंचतंत्र का फारसी भाषा में अनुवाद अबुल फजल ने अनवर ए सदात नाम से तथा मौलाना हुसैन फैज ने यार दानिश नाम से किया।
  • हाजी इब्राहिम सरहद अथर्ववेद का, मुल्लाशाह,मोहम्मद ने राजरंगीणी का अब्दुर रहीम खानखाना ने युजुक ए बाबरी का हे जीसने लीलावती का फारसी में अनुवाद किया। अकबर की कार को हिंदी साहित्य का सर स्वर्णकार कहा जाता है। अकबर ने बीरबल को कविप्रिय एवं नरहरि को महापात्र की उपाधि प्रदान की।
  • बुलन्द दरवाजा का निर्माण अकबर ने गुजरात विजय के उपलक्ष्य में कराया था।
  • चारबाग बनाने परंपरा अकबर के समय से शुरू हुई।
  • अकबर ने शीरी कलम की उपाधि अब्दुलस्समद को एवं जड़ी कलम की उपाधि मोहम्मद हुसैन कश्मीरी को दिया।

जहांगीर (1605-1627)

अकबर के बाद (मूगल सम्राज्य| mughal empire family tree) को आगे बनाये रखने का काम जहागीर ने किया. जो अकबर का उत्तराधिकारि था। जहागीर  जो 24 अक्टूबर 16 को नरुउद्दीन मोहम्मद जहांगीर बादशाही गाजी की उपाधि धारण कर गद्दी पर बैठा।

  • जहागीर का जन्म 30 अगस्त 1569 में हुआ था। अकबर ने अपने पुत्र का नाम सलीम सूफी संत शेख सलीम चिश्ती के नाम पर रखा।
  • जहांगीर को न्याय की जंजीर के लिए याद किया जाता है . यह जंजीर सोने की बनी थी . जो आगरा के किले के शाहबुर्ज एव यमुना तट पर स्थित पत्थर के खम्बे मे लगवाई हुई था।
  • जहागीर ने शुरू करवाई तुजुक ए हांगीरी नामा आत्मकथा को पूरा करने का श्रेय मौतबिंद खा को है।
  • जहागीर के सबसे बड़े पुत्र खुसरो ने 1606 मे अपने पिता के विरुद्ध विद्रोह कर दिया खुसरो और जहांगीर की सेना के बीच युद्ध  जालंध र के निकट वेरावल नामक मैदान में हुआ खुसरो को पकड़कर कैद में डाल दिया गया।
  • खुसरो की सहायता देने के कारण जहांगीर ने सिक्खों के पांचवे गुरु अर्जुन देव को फांसी दिलवादी। अहमदनगर के वजीर मालिक अंबर के विरुद्ध सफलता से खुश होकर जहांगीर ने खुर्रम खा को शाहजहां की उपाधि प्रदान की।
  • 1622 मे गंधार मुगलों के हाथ से निकल गया अब्बास ने इस पर अधिकार कर लिया।
  • नूरजहां इरानि वासी मिर्जा गयास की पुत्री नूरजहां का वास्तविक नाम मेरुन्निसा था. 1594 मे नूरजहां का विवाह अलीकूलि बेगम से संपन्न हुआ।
  • जहांगीर ने गियास बेग को शाही दीवान बनाया एव इतमाद उद दौला की उपाधि। जहांगीर के शासनकाल में ईनियों को उच्चपद प्राप्त हुए।
  • लाडली बेगम से अफगान एवं मेहरुन्निसा की पुत्री थि जिसकी सादी जहागीर के पुत्र शहरयार से हुआ। नूरजहां की मां अस्त बेगम ने गुलाब के इत्र निकलने की विधि खोजी थी।
  • महावत खा ने झेलम नदी के तट पर 1622 मे जहांगीर, नूरजहां, एवं उसकेभाई आसक खा को बंदी बना लिया था।
  • जहांगीर के 5 पुत्र थे 1खुसरो 2परवेज 3खुर्रम 4शहरयार 5 जहादार।
  • 28 अक्टुबर 1627 को भीमवार नामक स्थान पर जहांगीर की मृत्यु हो गई। उसे शहादरा (लाहौर) मे रावी नदी के किनारे दफनाया गया।
  • मुगल चित्रकार अपने चरमोत्कर्षपर जहांगीर के शासनकाल में पहुंची।
  • जहांगीर ने आगा राजा के नेतृत्व में आगरा मे एक चित्रण्शाला की स्थापना की।
  • जहांगीर के समय को चित्रकला का स्वर्ण काल कहा जाता है।
  • अशोक की कौशांम्बी स्तम्भ (वर्तमान में प्रयाग) समुंद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति तथा जहांगीर का लेखउत्कीर्ण है।
  • जहांगीर की मकबरा का निर्माण नूरजहां ने करवाया था।
  • जहांगीर के शासनकाल में कैप्टन ह्कींस प्रथम अंग्रेज सर टॉमस रो विलियम एवं एडवर्ड टैरी जैसे यूरोपियन यात्री आए थे।
  • शाहजहां 1627-1657)
  • जहांगीर के बाद सिंहासन पर शाहजहां बैठा।
  • जोधपुर के शासक मोटा राजा उदयसिंघ की पुत्री जगत गोसाई के गर्भ 5 जनवरी 1592 को खुर्रम (शाहजहां) का जन्म लाहौर में हुआ था।
  • 4 फरवरी 1628 को शाहजहा आगरा के अबुल मुजफ्फर शाहबुद्दीन मोहम्मद साहिब किरन ए सानी की उपाधि प्राप्त कर सिंहासन पर बैठा।
  • इसने नूरजहां को दो लाख रुपए प्रतिवर्ष के पेंशन देकर लाहौर जाने दिया. 1645 में इसकी मृत्यु।
  • अपनी बेगम मुमताज की याद में शाहजहां ने ताजमहल का निर्माण करवाया. उसके कब्र के ऊपर करवाया।
  • उस्ताद ईशा ने ताजमहल की रुप रेखा तैयार किया।
  • ताजमहल का निर्माण करनेवाला मुख्यस्थापत्यक उस्ताद अहमद लाहोरी था।
  • मयूर सिंहासन का निर्मान शाहजहां ने कराया था।
  • इसका मुख्य कलाकार बे बादल खा था।
  • शाहजहां ने 1632 मे अहमदनगर को भूख्य मुगल समाज में मिला लिया शाहजहां ने 1638 राजधानी को आगरा से दिल्ली लाने के लिए यमुना नदी के दाहिने तट पर शाहजहानाबाद की नीव डाली।
  • आगरे की जामा मस्जिद का निर्माण शाहजहां की पुत्री जहांआरा ने करवाई।
  • शाहजहां के दरबार में प्रमुख चित्रकार मोहम्मद फकीर एवं मीर हासिन थे।
  • शाहजहां के दरबार में वसीमधर्म मिश्र एवं हरिनारायण मिश्र नाम के दो संस्कृत कवि थे।
  • शाहजहां ने संगीत के लाल खा को गुण समंदर की उपाधि एवं संगीतज्ञ्य जगन्नाथ जो हिंदी के कवि थे महाकविराय की उपाधि से सम्मानित किया।
  • शाहजहां की पुत्र में दारा शिकोह सर्वाधिक विद्वान था इसमें भागवत गीता योगवशिष्ठ उपनिषद एवं रामायण का अनुवाद फारसी में करवाया। शाहजहां ने दिल्ली के एक कॉलेज का निर्माण एवं दारुल बका नाम कॉलेज की मरम्मत करवा।

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शाहजहाँ (1627-1657)

जहाँगीर के बाद सिहासन पर शाहजहाँ बैठा। जिसने (मूगल सम्राज्य| mughal empire family tree) को आगे बनाये रखने का काम किया ओर सिहासन पर बैथा।4 फरवरी, 1628 ई. को शहजहाँ आगरा मे अबुल मुजफ्फर शहाबुद्दिन मुहम्मद साहिब किरन-ए-सानी की उपाधि प्राप्तकर सिहासन पर बैठा ।

  • जोधपुर के शासक मोटा राजा उद्य सिह की पुत्री जगत गोसाई के गर्भ से 5 जनवरी, 1592 ई. को खुर्र्म (शाहजहाँ) का जन्म लाहौर मे हुआ था। 1612 ई. मे खुर्र्म का विवाह आसफ खाँ की
  • पुत्री अरजुमन्द बानो बेगम से हुआ, जिसे शाहजहाँ ने मलिक‌‌‌‌‌-ए-जमानी की उपाधि प्रदान की । 7 जुन, 1631ई. मे प्रसव-पीडा के कारण उसकी मृत्यु हो गयी ।

शाहजहाँ ने आसफ खाँ को वजीर पद एव महावत खाँ को खानखाना की उपाधि प्रदान की।

इसने नूरजहाँ को दो लाख रु0 प्रतिवर्ष की पेशन देकर लाहौर जने दिया, जहाँ 1645 ई. मे उसकी मृत्यु हो गयी। अपनी बेगम मुमताज महल की याद मे  शाहजहाँ ने ताजमहल का निर्माण आगरा मे उसकी कब्र के ऊपर करवाया ।

उस्ताद ईशा ने ताजमहल की रुप-रेखा तैयार की थी । ताजमहल का निर्माण करनेवाला मुख्य स्थापत्य कलाकार उस्ताद अहमद लाहौरी था।

शाहजहाँ ने 1638 ई. मे अपनी राजधानी को आगरा से दिल्ली लाने के लिए यमुना नदि के दाहिने तट पर शाहजहाँनाबाद की नीव डाली । आगरे के जामा मस्जिद का निर्माण शाहजहाँ की पुत्री जहाँआरा ने करवाई ।

शाहजहाँ के दरबार के प्रमुख चित्रकार मुहम्मद फकीर एव मीर हासिम थे । शाहजहाँ के दरबार के वंशीधर मिश्र एव हरिनारायण मिश्र नाम के दो संस्कृत के कवि थे ।

शाहजहाँ ने संगीतज्ञ लाल खाँ को गुण समन्दर की उपाधि एव संगीतज्ञ जगन्नाथ जो हिन्दी का कवि भी था, को महाकविराय की उपाधि से सम्मनित किया।

शाहजहाँ के पुत्रो मे दारा शिकोह सर्वाधिक विव्दान था । इसने भगवदगीता , योगवशिष्ठ , उपनिषद एव रमायण का अनुवाद फारसी मे करवाया ।

इसने सर्र-ए-अकबर (महान रहस्य) नाम से उपनिषदो का अनुवाद करवाया था । दारा शिकोह कादिरी सिलसिले के मुल्ला शिष्य था ।

औरंगजेब 1658-1707

औरंगजेब मुगलो के सरदार जो अपने ही पिता कर सिन्हसन पर बैठा था। ओर (मूगल सम्राज्य| mughal empire family tree) को आगे बनाये रखा। औरंगजेब का जनम 24 अक्टुबर 1618 को दोहाद नामक स्थान पर हुआ।

  • औरंगजेब के बचपन का अधिकांश समय नूरजहां के पास बिता 18 मई 1637 को फारस के राजघराने की दीलरास बानो बेगम के साथ औरंगजेब का निकाह  हुआ।
  • आगरा पर कब्जा कर जल्दबाजी में औरंगजेब ने अपना राज्यअभिषेक अबुल मुजफ्फर महूउद्दीन मुजफ्फर औरंगजेब बहादुर आलमगिरी की उपाधि से 31 जुलाई 1658 को करवाया।
  • देवराई के युद्ध में सफल होने के बाद 15 मई 1659 दिल्ली में प्रवेश की और शाहजहां के शांदार महल में  5 जून 1659 को दूसरी बार राज्याभिषेक करवाया।
  • औरंगजेब की गुरु थे अमीर मोहम्मद हकीम।
  • औरंगजेब सुन्नी धर्म को मानता था उसे जिन्दा पीर कहा जाता था।
  • जयश्री एवं शिवाजी के बीच पुरन्दर की संधि 22 जून 1665 को संपन्न हुई।
  • मई 1666 को आगरा के किले के दीवाने आम में औरंगजेब की समक्ष शिवाजी उपस्थित हुए।
  • यहां शिवाजी को कैदकर जयपुर भवन में रखा गया।
  • इस्लाम नहीं स्विकार करने के कारण सिक्खों के नौवे गुरु तेगबहादुर की हत्या औरंगजेब ने 1675 में दिल्ली में करवादी थी।
  • औरंगजेब ने 1669 में जजिया कर को पुन्ह लागू किया।
  • औरंगजेब ने बीवी का मकबरा का निर्माण 1679 मे औरंगाबाद में करवाया।
  • 1685 मे बीजापुर एवं 1687 में गोलकुण्डा को औरंगजेब ने मुगल  सामराज्य में मिला लिया।
  • मदन्ना एवं अकन्ना नाम ब्राह्मणों का संबंध गोलकुण्डा के शासक अबुल हसन से था।
  • औरंगजेब की समय में हिंदू मानसवदारो की संख्या लगभग 337 थी. जो आन्य मुगल सम्राट की तुलना में अधिक थी और सर्वाधीक हिंदू अधिकारियों के नियुक्त करने वाले मुगल सम्राट था।
  • औरंगजेब का पुत्र अकबर ने दुर्गादास के बहकावे में आकर अपने पिता के खिलाफ विद्रोह किया।
  • औरंगजेब ने कुरान को अपने शासन पर आधार बनाया इसने सिक्के पर कलमा खुदवाना नव्जोर त्योहार मनाना भाग की खेती करना गन्ना बजाना झरोखा दर्शन तुला दान प्रथा इस प्रथा में सम्राट को उनकी उसके जन्म दिन पर सोने चांदी तथा अन्य वस्तुओं के दौलत की प्रथा थी यह अकबर के जमाने में प्रारंभ हुई थी आदि पर प्रतिबंध लगा दिया।
  • पऔरंगजेब ने दरबार में संगीत पर पाबंदी लगादी तथा सरकारी संगीतगो को अवकाश दे दिया गया भारतीयशास्त्रीय संगीत पर फारसी में पुस्तकें औरंगजेब के शासन काल में लिखी गई औरंगजेब स्वयं विणा बजाने में दक्ष था।
  • औरंगजेब 1665 में हिंदू मंदिर को तोड़ ने का आदेश दिया उसकी शासनकाल में तोड़े गये मंदिर में सोमनाथ का मंदिर बनारस का विश्वनाथ मंदिर एवं वीर सिंघ देव ने जहांगीर काल के मथुरा में निर्मित केशवराय मंदिर थे।
  • औरंगजेब की मृत्यु 20 फरवरी 1707 को इसे खुल्दाबाद (रोजा) कहलाता है।
  • औरंगजेब के समय सुबो की संख्या 20 थी।
  • औरंगजेब दारुल हर्व ।(काफिरो का देश) को दारुल इस्लाम (इस्लाम का देश ) मे परिवर्तित करने को अपना महत्वपूर्ण लक्ष्य मानता था।

नोट: भारत मे मुगलो का आगमन से लेकर मुगलो के पतन तक के सभी जानकरिया( mughal empire family tree) विस्तार से बतया गया है. जो भी जानकरिया दिये गये है वो सब किताबो ओर रिसर्च कर के बताये गये है।

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